
डिजिटल भारत तब पूरा होगा जब गांव का छात्र भी तकनीक से डरने की बजाय उसे औजार बनाए।
इंटरनेट पहुंच मात्र पर्याप्त नहीं। जरूरत है समझने की — फॉर्म भरना, जानकारी जांचना, ऑनलाइन सेवा का उपयोग, और डिजिटल सुरक्षा।
ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल डिवाइड शिक्षा के अंतर को और चौड़ा कर देता है। जो छात्र ऑनलाइन सामग्री तक नहीं पहुंच पाते, वे प्रतियोगिता में पीछे रह जाते हैं।
सामुदायिक डिजिटल केंद्र, शिक्षक प्रशिक्षण, और स्थानीय भाषा में सामग्री इस दूरी को पाट सकते हैं।
तकनीक का उद्देश्य सुविधा है, अलगाव नहीं। गांव तक डिजिटल साक्षरता पहुंचे, तभी आधुनिक भारत सबका होगा।
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